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Blood Cancer in Hindi – ब्लड कैंसर के लक्षण, कारण, स्टेजेस

ब्लड कैंसर क्या है (Blood Cancer in Hindi), जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है कि यह ब्लड से रिलेटिड कैंसर होता है या यह कहें की इस प्रकार का कैंसर सीधे आपके ब्लड, बोन मेरो और लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है।  What Is Blood Cancer In Hindi – ब्लड कैंसर क्या होता है, Blood Cancer Stages in Hindi – ब्लड कैंसर की स्टेजेस, Types of Blood Cancer in Hindi – ब्लड कैंसर के कितने प्रकार हैं ?


Table Of Content –

– ब्लड कैंसर क्या है ?
– ब्लड कैंसर की स्टेजेस ?
– ब्लड कैंसर के कितने प्रकार हैं ?
– ब्लड कैंसर के कारण ?
– ब्लड कैंसर के लक्षण ?

What Is Blood Cancer In Hindi – ब्लड कैंसर क्या होता है ?

रक्त कैंसर जिसे ल्यूकेमिया के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार का कैंसर है, जो रक्त और अस्थि मज्जा से संबंधित है। बल्ड कैंसर (Blood Cancer) होने पर कैंसर की कोशिकाएं यानि सैल्स व्यक्ति के शरीर में खून को बनने नहीं देते  इंसान को, जिस वजह से व्यक्ति में खून की कमी होने लगती है। जिसे ब्लड कैंसर कहा जाता है।

रक्त कैंसर या ब्लड कैंसर क्या होता है, इसके प्रकार, लक्षण (Blood cancer Symptoms in Hindi) और निदान कैसे किया जाता है, इससे संबंधित जानकारी नीचे दी गयी है।

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Blood Cancer Stages in Hindi – ब्लड कैंसर की स्टेजेस

मेटास्टेसिस के आधार पर, ब्लड कैंसर को 3 चरणों को बाँटा गया है। ये स्टेज ब्लड कैंसर के लक्षणों (Blood Cancer ke Lakshan in Hindi) और रेट के अनुसार निर्धारित किए जा सकते हैं। 

ल्यूकेमिया – ल्यूकेमिया भी खून से जुड़ी ही एक गंभीर बीमारी है, जिसे ब्लड कैंसर भी कहा जाता है। इस बीमारी में शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स सफेद रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) की संख्या असामान्य रूप से बढ़ जाती है। माना जाता है कि ल्यूकेमिया कुछ ब्लड सेल्स के डीएनए में म्यूटेशन के कारण होता है।

ल्यूकेमिया रोग के बारे पूरी जानकारिया - Click Here

लिम्फोमा – लिम्फोमा एक ऐसा कैंसर है जो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) में मौजूद संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं में शुरू होता है। लिम्फोमा में कई प्रकार होते हैं, लेकिन इनमें से दो मुख्य हैं- हॉजकिन्स लिम्फोमा और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा

लिम्फोमा रोग के बारे पूरी जानकारिया - Click Here

मायलोमा – मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो मैलिग्नेंट प्लाज्मा कोशिकाओं के कारण होता है।  यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो शरीर में प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करती है। भारत में इसके मामले कम देखे जाते हैं,

मायलोमा रोग के बारे पूरी जानकारिया - Click Here

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Types of Blood Cancer in Hindi – ब्लड कैंसर के कितने प्रकार हैं

ब्लड कैंसर मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं - 
– ल्यूकेमिया
– लिंफोमा
– मायलोमा

Symptoms of Blood Cancer – ब्लड कैंसर के लक्षण

किसी भी अन्य बीमारी की तरह ब्लड कैंसर के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो उसके होने का संकेत देते हैं। वैसे तो अलग-अलग तरह के ब्लड कैंसर के लक्षण (Symptoms of Blood Cancer) भी अलग-अलग होते हैं। यहां कुछ सामान्य लक्षण के बारे में हम चर्चा कर रहे हैं। जिनसे ब्लड कैंसर होने का अनुमान लगाया जा सकता है। 

– खांसी या सीने में दर्द होना
– बुखार होना
– त्वचा पर खुजली होना
– भूख न लगना
– कमजोरी महसूस होना
– जोड़ों में अक्सर दर्द होना
– सांस लेने में परेशानी होना
– रात को पसीना आना
– वजन कम होना
– खासी के साथ खून आना

यदि किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण नज़र आए तो उसे  तुरंत अपने स्वास्थ की जांच करानी चाहिए.

Causes of Blood Cancer in Hindi – ब्लड कैंसर के कारण / ब्लड कैंसर क्यों होता है

कैंसर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिससे शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं। कुछ सामान्य कारणों में उम्र बढ़ना, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, पारिवारिक इतिहास और कुछ संक्रमण शामिल हैं। (Causes of Blood Cancer in Hindi) एक्सपर्ट के अनुसार अभी तक ब्लड कैंसर के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। 

– ल्यूकेमिया का पारिवारिक इतिहास
– धूम्रपान और तंबाकू खाने से भी ब्लड कैंसर हो सकता है
– एक्स-रे या अन्य रेडिएशन किरणों के संपर्क में आने से
– कीमोथेरेपी या विकिरण चिकित्सा द्वारा कैंसर के लिए उपचार
– ब्लड कैंसर 30 साल या उससे अधिक होने पर होता है
– विकिरण के उच्च स्तर के संपर्क में रहने से
– बेंजीन जैसे रसायनों के संपर्क में रहने से

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किडनी में सूजन की समस्या । Nephritis in Hindi । किडनी में सूजन: कारण, लक्षण, प्रकार, इलाज

किडनी में सूजन क्या हैं, (Nephritis Meaning in Hindi) किडनी में सूजन के कारण क्या हैं, नेफ्राइटिस के मुख्य कारण, नेफ्राइटिस के मुख्य  लक्षण, नेफ्राइटिस की पहचान कैसे करें, किडनी में सूजन का इलाज क्या है, किडनी में सूजन का निदान (Diagnoses of Nephritis in Hindi) ये सभी जानकारिया हम इस पोस्ट में आपको बताने वाले है -

किडनी में सूजन - Nephritis in Hindi नेफ्राइटिस के कारण, लक्ष्ण और निदान

Table Of Content –

– नेफ्राइटिस क्या है किडनी में सूजन क्या है?
– नेफ्राइटिस के लक्षण क्या हैं ?
– नेफ्राइटिस की कारण ?
– नेफ्राइटिस के प्रकार ?
– नेफ्राइटिस के ईलाज और निदान  ?

नेफ्राइटिस क्या है What is Nephritis in Hindi

किडनी में सूजन की समस्या एक तरह की मेडिकल स्तिथि है इस रोग को अंग्रेजी में “नेफ्राइटिस” (Nephritis) कहा जाता है। जब किडनी के नेफ्रोन और आस-पास के ऊतकों में सूजन व लालिमा विकसित हो जाती है, किडनी में सूजन पैदा हो जाती है। किडनी में सूजन आने से किडनी रक्त को पूर्ण रूप से फ़िल्टर नहीं कर पाता है। इसके अलावा कुछ लक्षण महसूस कर सकते है, जैसे बुखार, मलती, पेशाब में खून आना व उल्टी आदि। तो उसे नेफ्राइटिस कहा जाता है 

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नेफ्राइटिस के लक्षण Symptoms of Nephritis in Hindi किडनी में सूजन आने का लक्षण

नेफ्राइटिस या किडनी में सूजन की समस्या के कई कारण हो सकते हैं। जब किडनी में सूजन आ जाती है तो वे पूरी तरह से खून को फिल्टर नहीं कर पाती है. किडनी में सूजन आने पर कई लक्षण पैदा हो जाते हैं जैसे -

– असहनीय और तीव्र दर्द होना
– पेशाब में अधिक प्रोटीन का होना
– बहुत कम पेशाब का आना
– बुखार आना
– ठंड लगना और कांपना
– मतली और उल्टी
– पेट में दर्द  होना
–पेशाब करने में दर्द होना
– भरा या लाल रंग का पेशाब
– सांस लेने में दिक्‍कत होना
– अधिक थकान लगना
– सांसों से बदबू आना
– सूजन और सांस की तकलीफ होना

नेफ्राइटिस के प्रकार Types of Nephritis in Hindi किडनी में सूजन के प्रकार

किडनी की सूजन कई प्रकार की होती है। हमारी जानकारी के अनुसार किडनी में सुजन के तीन प्रकार है सूजन का हर प्रकार प्रभावित जगह पर निर्भर करता है, कि किडनी का कौन सा हिस्सा स्थिति से प्रभावित हुआ है -

– ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis)
– इंटरस्टीशियल नेफ्राइटिस (Interstitial Nephritis)
– पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis)

नेफ्राइटिस की कारण Causes of Nephritis in Hindi किडनी में सूजन के कारण क्या हैं

किडनी में सूजन होने के कई कारण हो सकते है। रक्त में पोटेशियम की कमी होने से किडनी में सूजन हो सकता है। बहुत से मामलो में देखा गया है की ग्रैनुलोमैटोसिस (granulomatosis) जैसी बीमारी जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है। बैक्टीरियल संक्रमण के अधिक प्रहार किडनी पर पड़ने से किडनी में सूजन आ सकती है। समय के साथ ही उम्र बढ़ते चली जाती है 60 साल से अधिक की आयु होने पर भी किडनी में सुजन होने का आशंका होने लगता है।

अगर किसी व्यक्ति को इतिहास में कैंसर जैसी बीमारी हुई हो उस व्यक्ति को भी नेफ्राइटिस होने का खतरा बना रहता है।

नेफ्राइटिस के ईलाज और निदान Nephritis Treatment in Hindi किडनी में सूजन का इलाज

भारत में किडनी में की समस्या बहुत आम बात हो गयी है। 10 में से 1 व्यक्ति को उनके जीवन में किडनी की बीमारी जरूर होता है। किडनी की समस्या कुछ लोगो में लंबे समय से प्रभावित करती है और कुछ में अन्य रोग के कारण किडनी में सूजन की समस्या हो जाती है। किडनी की सूजन (Nephritis) का इलाज आपके मामले के प्रकार, कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है।

सबसे पहले जरूरी है कि नेफ्रोटिक का निदान करना और प्रयोगशाला जांच से इसकी पुष्टि करना है.

इलाज के दौरान सामान्य और स्वस्थ आहार लेने की सलाह दी जाती है.

इलाज के दौरान इन्फेक्शन होने से रोग बढ़ सकता है. इसके लिए पूरी सावधानी रखना जरूरी होता है.

प्रोटीन की मात्रा को सीमित रखें. रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए डाइट में फैट का सेवन कम करें.

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Subah Jaldi Kaise Uthe : सुबह जल्दी उठने के आसान तरीके / Wake Up Early In The Morning

How To Wake Up Early In The Morning - (सुबह जल्दी उठने के आसान तरीके), Subah Jaldi Kaise Uthe?
हेलो दोस्तों ! हमारे वेबसाइट में आपका स्वागत है.. (Subah Jaldi Uthne Ka 06 Tips) जो लोग सुबह जल्दी नहीं उठ पाते है उनके लिए आज की यह पोस्ट खासतौर पर लिखी गई है सुबह जल्दी उठने की आदत डालने के लिए आपको निचे दी गयी बातो को ध्यान में रख कर ईमानदारी से इसका पालन करना होगा-  जो सुबह जल्दी उठने की आदत बनाना चाहते है. वो इस पोस्ट को पूरा पढ़े.-

Table Of Content –

–  सुबह जल्दी कैसे उठें?
– रात में जल्दी सोने की आदत
– दिन को नहीं सोना है।
–  सोते समय मोबाइल का उपयोग
– अलार्म का उपयोग
– सोने से पहले Book पढ़ें
–  सोने से पहले ज्यादा ना सोचे
– अलार्म का उपयोग

सुबह जल्दी कैसे उठें? (How To Wake Up Early in The Morning in Hindi)

जल्दी उठने के कुछ सामान्य से तरीके आप जानते होंगे। जिन्हें आप अपने जीवन मे जल्दी उठने के लिए फॉलो भी करते होंगे। लेकिन आज हम आपको कुछ अलग Tips देंगे। अगर आप लंबे समय तक शारीरिक व मानसिक रूप से फिट रहना चाहते हैं तो फिर आपको सुबह जल्दी उठने की आदत जरूर बनानी चाहिए।

सुबह की नींद लेने का मजा ही कुछ और होता है, लेकिन जब आपको सुबह जल्दी उठने के फायदों के बारे में पता चलेगा तो आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे। निचे आपको बहुत सी जानकारी सुबह जल्दी कैसे उठें इसके बारे में बताया गया है -

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01 रात में जल्दी सोने की आदत – Sleeping habit at night

जब आप रात में जल्दी और सात से नौ घंटे की नींद नहीं लेते हैं, तो इससे आपके ब्रेन पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह अवसाद, चिंता और मूड के अन्य विकारों को जन्म देता है। यह सबसे पहली और जरूरी बात है। हमारे शरीर को अच्छे से काम करने के लिए कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद की बहुत जरूरत होती हैं। अगर आप रात में जल्दी सोते है तो सुबह बिलकुल जल्दी उठ पायेगा.

02 सोते समय मोबाइल का उपयोग – Mobile use at bedtime ?

सोते में सोने से पहले एक घंटा तक मोबाइल का उपयोग बिलकुल न करें. अब जब तक आप सोते समय अपने मोबाइल का उपयोग करते हैं तो ज्यादा चांस हैं की आप अपने उस निर्धारित समय पर नहीं सो पाएंगे। Mobile को दूर रख कर आप अपने मन को थोड़ा हल्का रख सकेंगे ताकि वह भी सोने के मूड में आ जाए। रात में सोने से पहले जितना हो सके मोबाइल को दूर ही रखें।

03 अलार्म का उपयोग करना – Use the Alarm Clock

दोस्तों अलार्म एक ऐसा चीज हैं जो हमें सुबह उठने में मदत करती हैं. रात में हमेसा सोने से पहले अलार्म का उपयोग करना चाहिए जिससे आपको सुबह जल्दी उठने में मदद मिलेगा. देखा गया हैं की ज्यादातर लोग अलार्म को अपने बिस्तर के पास ही रखते हैं, जिससे अलार्म के बजते ही उसे बंद कर देते है इसलिए जितना हो सके अलार्म को अपने बिस्तर से दूर ही रखें।

04 सोने का समय नियमित करें – Regular sleeping time

अगर हम अगले 20 दिन या 30 दिन के लिए हम सुबह जल्दी उठेंगे तब हमारा दिमाग कहता है कि चलो कोई नहीं कुछ ही दिनों की बात है, कर लेते हैं। और फिर 30 दिन बाद आपके शरीर को सुबह जल्दी उठने की आदत बन जाएगी तो इसलिए हमें 20 से 30 दिनों तक सोने का सही समय नियमित करें इससे आपको सुबह जल्दी उठने में बहुत मदद मिलेगा।

05 हल्का खाना खाये

आयुर्वेद का मानना हैं और कहा भी जाता हैं की रात में हमेशा हल्का खाना खाने से आपकी सेहत अच्छी रहती हैं. और रात के समय खाने की मात्रा कम ही रखें और खाने में और सोने में कम से कम 2 घंटे का अंतर होना चाहिए. भोजन करने के बाद तुरंत ना सोएं और ना ही समय जाया करें भोजन के उपरांत अपना सारा ध्यान next day में आपको क्या-क्या करना है, इस बारे में प्लान बनाये.

आप सोने से दो-तीन घंटे पहले तक चाय या कॉफी पीने से परहेज करें, श्याम के बाद किसी भी तरह का कोई कैफीन युक्त पदार्थ का सेवन न करें। सोने से कुछ देर पहले एक गिलास गुनगुना दूध पी सकते हैं।

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 सुबह जल्दी उठने के फायदे –  Subah Jaldi Uthne Ke Fayde 

06 दिन को नहीं सोना है

दिन में सो जाना सुबह जल्दी न उठने का एक महत्वपूर्ण कारण है। दिन में सोने से रात में बिलकुल नींद नहीं आता है, ज्यादातर दखा गया है की जो लोग रात भर जागते है उन्हें दिन में बहुत नींद आता है इसलिए जितना हो सके रात में सोने का कोशिस करें. दिन में सोकर हम अनावश्यक रूप से शरीर को आलस्य का घर बनाते हैं। अत: रात में भरपूर गहरी नींद लेकर दिन में काम करना ही उचित माना गया है।

सुबह जल्दी उठने के लिए क्या करें? - सुबह जल्दी उठने का तरीका

➡️ आप सोने से दो-तीन घंटे पहले तक चाय या कॉफी पीने से परहेज करें।
➡️ रात को बहुत ज्यादा भारी भोजन न करें, हल्का भोजन ही करें।
➡️ रात में समय से सोना होगा और तभी आप अगली सुबह जल्दी उठ पाएंगे।
➡️ हर दिन अपने जल्दी उठने के समय को 15 मिनट तक कम करते जाएं ऐसा करने से आपको जल्दी उठने में मदद मिलेगी।
➡️ सोते समय मुँह धोकर सोये (यह महत्वपूर्ण है) आलस के साथ सोयेगे तो मॉर्निंग में भी आलस ही आयेगा।
➡️ मोबाइल को सोने से एक घण्टे पहले बंद करने की आदत डालें। इससे आपको बहुत सारे लाभ होंगे।
➡️ सोते समय मोबाइल फोन alarm sound को तेज करके सोये।
➡️ रात को सोते समय ये सोचे कि मुझे कल उठ के क्या-क्या करना इससे आपका दिमाग को जल्दी उठने का सिग्नल मिलेगा।
➡️ सुबह जल्दी उठने के तरीके | Subah Jaldi Kaise Uthe
➡️ रात को सोने से पहले रोजाना एक गिलास पानी पिए।

निष्कर्ष : आपको आज का ये आर्टिकल Subah Jaldi kaise Uthe aur Subah jaldi Uthne Ke Phayde / Tips In Hindi. की जानकारिया दिया है आपको अवश्य ही पसंद आया होगा। इस आर्टिकल को अपने सही दोस्तों को शेयर जरुर करें।

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आखिर क्यों झड़ते है | सिर के बाल 10 कारण ? 10 Reasons Losing hair In Hindi

सिर के बाल झड़ने के कारण - Reasons Losing hair In Hindi: दोस्तों.. बालो का झड़ना किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं आता (सिर के बाल झड़ने के 10 कारण) बाल हमारी पर्सनल्टी के लिए बहुत जरुरी होते है और इससे हम जवान भी दिखते है लेकिन जब आपके बाल झड़ने लग जाते है तो यह आपके लिए एक सिरदर्द बन जाता है जो की आपके Confidence को कम भी कर देता है.
सिर के बाल झड़ने के 10 कारण ? | क्यों झड़ते है सिर के बाल 10 Reasons Losing hair In Hindi

Table Of Content –

– सिर के बाल झड़ने के 10 कारण
– बाल झड़ने के कारण Causes of Hair Fall in Hindi
– गंजेपन का कारण
– क्यों झड़ते है सिर के बाल
– 10 Reasons Losing hair In Hindi
– बालों की बीमारियों से बचने के लिए

सिर के बाल झाड़ना |  गंजेपन का कारण

दोस्तों.. बालो का झड़ना किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं आता क्योंकि बाल हमारी पर्सनल्टी के लिए बहुत जरुरी होते है, मजबूत और घने बाल की चाह हर किसी की होती है। लेकिन कई बार हमारे बाल लगातार झड़ते हैं। बाल झड़ना एक आम समस्या है, जो पुरुष हो या महिला, किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसके पीछे कई बाल झड़ने के कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

Causes of Hair Fall in Hindi बाल झड़ने का सीधा असर खूबसूरती पर पड़ता है। क्या आपके बाल भारी मात्रा में झड़ते हैं? ऐसे में हो सकता है कि आप गंजेपन की ओर अग्रसर हो रहे हों। कहा जाता है कि बालों की शिकायत करने वालों में सबसे ज्यादा पुरुष होते हैं। बालों का झड़ना पुरुषों द्वारा की गई लापरवाही का कारक होता है।

बाल झड़ने के कारण – Causes of Hair Fall in Hindi

कई बार तो यह सेक्स हॉर्मोन में परिवर्तन के कारण होता है। कभी कभी यह इतना प्रबल होता है कि गंजेपन का कारण बन जाता है। कई बार देखा गया है की अत्यधिक धुम्रपान का सेवन करने से भी बालो का झाड़ना शुरु हो जाता है, अधिक धूम्रपान या शराब पीना- ऐसा देखा गया है कि जो लोग अधिक धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं उनमें बालों के झड़ने की समस्या काफी नजर आती है। 

आखिर क्यों झड़ते है सिर के बाल | Why does hair fall on the head?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसा बाल झड़ना (Hair Loss ) एक सामान्य परेशानी है। बाल झड़ने के पीछे प्रदूषण, तनाव या खराब लाइफस्टाइल भी एक वजह हो सकती है. 

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बाल झड़ने के 10 कारण (10 reasons for hair loss)

तनाव के कारण बाल झाड़ना

तनाव ➡️ आज की इस जिंदगी में हमारे शरीर से बड़ी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है, जिससे तनाव का स्तर बढ़ता है। या फिर हम बहुत ज्यादा समस्याओ और परेसनियो में घिरे रहते है जिसके कारन हमें तनाव महसूस होता है, ज्यादातर लोगों में यह देखा गया है कि भारी तनाव के कारण उनके बाल झड़ने लगते  हैं। तनाव के कारण भी हमारे बाल झड सकते है।

परिवार का इतिहास के कारण

परिवार का इतिहास ➡️ बहुत से लोगो के परिवारों में देखा गया है की अगर उनका बाप गंजापन का शिकार है तो उनके बेटे को भी ये समस्या होती जिसका मतलब साफ है की पारिवारिक इतिहास के कारण एसा होता है जहां तक पारिवारिक इतिहास का संबंध है, तो इसमें आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। आप सिर्फ उचित आहार और बेहतर लाइफस्टाइल के जरिए बाल झड़ने की संभावना को कम कर सकते हैं।

हेयर स्टाइल टूल का उपयोग करना

हेयर स्टाइल टूल ➡️ बहुत से लोग अपने बालो को अत्यधिक खुबसूरत दिखने के लिए बहुत सी प्रकार की चीजो का उपयोग करते है, जैसे - नहाने के बाद लोग अक्सर अपने बालों को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर की मदद लेते हैं। प्रतिदिन इस तरह से बाल सुखाने से बाल झड़ने शुरू हो सकते है। इसलिए एसे चीजो का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

हार्मोन परिवर्तन के कारण बाल झाड़ना

हार्मोन परिवर्तन के कारण ➡️ कई बार तो यह सेक्स हॉर्मोन में परिवर्तन के कारण भी बाल झड़ने लगता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोन के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी भारी मात्रा में बाल झड़ते हैं। सिर की ठीक तरीके से सफाई न करने के कारण भी बाल झड़ने लगते हैं। यानि की किसी अच्छे साबुन या सेम्पू से अपने सिर की साफ सफाई नहीं करने से भी बाल झाड़ना आम बात है।

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रसायनिक उत्पाद का नियमित प्रयोग

रसायनिक उत्पाद का प्रयोग ➡️ आज के समय में अधिकतर कास्मेटिक उत्पाद जिन्हें हम बालो में लगाते है उनमे हानिकारक रसायन रहते हैं, जो बालों को कमजोर करने के साथ-साथ बालों से संबंधित अन्य समस्याओं को भी जन्म देते हैं। जिनके कारण सिर के बाल झड़ने लगते है, बहुत सी प्रकार की शैंपू, कंडीश्नर और यहां तक कि हेयर ऑयल में हानिकारक रसायन मौजूद होते है जो कि हमारे बालों को नुकसान पहुंचाते हैं।
अगर आप एक ऐसे इन्सान है जो नहाते समय हर बार शैम्पू या साबुन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते है तो यह भी आपके बालो के झड़ने का कारण बन सकता है तो इनका इस्तेमाल जरुर करे पर लिमिट में करे.

गलत खानपान के कारण बालो का झाड़ना

गलत खानपान ➡️ अक्सर हम हमेसा चीजो का सेवन करते है जो हमारे शारीर के लिए नुकसानदायक होते है जिसके कारण हमारे स्वस्थ पर बुरा असर पड़ता है, और हम किसी बीमारी का शिकार हो जाते है जिसमे बालो का झाड़ना भी हो सकता है, अगर आप बहुत अधिक मात्रा में मिर्च-मसाले व तली हुई चीजों का सेवन करते है तो यह भी आपके बालो को कमजोर कर देता है जिस कारण आपके बाल झड़ने लग जाते है. इसलिए जितना हो सके अपना खानपान में हमेसा ध्यान रखें। 

मौसम के परिवर्तन के कारण

अप्रिय मौसम ➡️ आपके ऑफिस या घर में लगा एयर कंडीश्नर जो की आपके लिए आरामदायक और सुखद साबित हो सकता है, पर आपके बालों के साथ ऐसा बिलकुल भी नहीं है। जैसा की हम जानते है हमारे सिर के बाल काफी नाजुक होते हैं, येसे वातावरण में बदलाव का असर इस पर सबसे ज्यादा पड़ता है जिसके कारण आपके बाल झड़ने लग सकता है।

सोने की समस्या के कारण

सोने की समस्या ➡️ न सोने का असर आंखों के साथ-साथ सिर पर भी दिखता है। इंसोमिया, नार्कोलेप्सी और अन्य सोने संबंधी विकार बालों की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। इसलिए हमें जरुरी होता है की नींद पूरी करना अगर हम निर्धारित समय से कम सोते है तो इसके कारण भी बालो का झड़ने की समस्या हो सकती है, कई  बार तो यह गंजेपन का कारण भी बन जाता है।

अधिक गर्म पानी का उपयोग

गर्म पानी का उपयोग ➡️ अगर आप नहाने में अधिकतर गर्म पानी का उपयोग करते हैं। तो वह भी आपके बालों के लिए ठीक नहीं है। गर्म पानी आपके बालों की आवश्यक नमी को दूर कर देता है और आपके बाल रूखे हो जाते हैं। इसलिए जहां तक हो सके गर्म पानी का बहुत कम उपयोग करें।

चिकित्सा व उपचार के कारण

चिकित्सा व उपचार ➡️ मानसिक कष्ट और तरह तरह की बिमारिय आज के समय में बढ़ रहा है। जब इसके लिए हम उपचार कराते हैं और दवाई का प्रयोग करते हैं तो यह बाल की सेहत को और खराब कर देता है। किसी दवायों का भारी खुराक का सीधा संबंध बाल झड़ने और गंजेपन से होता है।

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यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है, अधिक जानकारी के लिए आप किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह जरुर ले...

सीने में जलन क्यों होता है ? What is Heartbunrn ? जाने पूरी जानकारी -


सीने में जलन को आम बोलचाल की भाषा में 'दिल में जलन' यानी (Heartbunrn) भी कहा जाता है, हालाकि दिल से इस समस्या का कोई रिश्ता नहीं होता। इसके कुछ लक्षण दिल का दौरा और अन्य ह्रदय संबधी रोगों के समान भी होते हैं।

इस पोस्ट में हम इसी से सम्बंधित जानकारी बताने वाले है , की सीने में जलन होने के क्या कारण है, सीने में जलन के क्या-क्या लक्षण है.

आज के व्यस्त और लापरवाह जीवनशैली में कई लोग इस समस्या से जूझते हैं। समय पर नहीं खाने, ज्यादा खा लाने से और कई बार मसालेदार भोजन करने के बाद लोगों में सीने में जलन की परेशानी उत्पन्न होती है। इससे आपके सेहत में बहुत बुरा असर पड़ता है.

सीने में जलन के कारण | Causes of  Heartburn

- अत्यधिक धूम्रपान (Excessive Smoking)
- धूम्रपान के बाद खाना खा के तुरंत बाद सो जाना।
- चर्बी, कच्चा या अधपका मांस आदि का अधिक सेवन
- ठीक से नींद का पूरा न होना , कम सोना
- अत्यधिक भोजन करना भी इसका कारण हो सकता है
- भोजन को ठीक चबाकर न खाना ये भी एक कारण हो सकता है
- मसालेदार भोजन, खट्टे फल, लहसुन, टमाटर आदि का अधिक सेवन करना।
- रात का बचा हुआ खाना को खाना, इत्यादि

सीने में जलन के और भी बहुत सी कारण हो सकते है , अगर आप भी इस परेशानी से जुज रहे है तो आप किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह जरुर ले. - छाती में दर्द

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दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको बस सीने में जलन क्यों होता  है? सीने में जलन के क्या लक्षण ? और सीने में जलन के कारण इसकी जानकारी दी है. आप ये जानकारी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरुर करें -

फोबिया क्या है? (What is Phobia Explained in Hindi)

फोबिया (Phobia) एक प्रकार का मनोविकार है जिसमें व्यक्ति को विशेष वस्तुओं, परिस्थितियों या क्रियाओं से डर लगने लगता है. फोबिया (Phobia) ग्रीक भाषा के शब्द ‘Phobos’ से आया है, जिसका अर्थ होता है ‘डर’. डर की तुलना में फोबिया (phobia) ज्यादा प्रचलित है। ये तब होते हैं जब किसी व्यक्ति में किसी स्थिति या वस्तु के बारे में खतरे की बढ़ी हुई या अवास्तविक भावना पैदा होती है।

फ़ोबिया (Phobia) क्या हैं | फ़ोबिया के प्रकार Types Of Phobia In Hindi

Table Of Content -

1. फोबिया क्या है (What Is Phobia)
2. फोबिया रोग किसकी कमी से होता है  (What causes Alzheimer's)
3. फोबिया के लक्षण (Symptoms Of Phobia Disease)
4. फोबिया होने के क्या कारण है ? (What are The Causes of Phobia)
5. फोबिया कितने प्रकार के होते है ? (World Alzheimer's Day)
6. फोबिया के शुरुआती लक्षण ?  (Early Symptoms Of Alzheimer's Disease)
7. फोबिया  से बचाव ? (Preventing Alzheimer's disease)

डर आपके लिए सजा बन जाए तो यह आपके लिए खतरे भी हो सकता है, क्योंकि आपको मात्र डर नहीं है बल्कि आप फोबिया से ग्रस्त हैं। फोबिया केवल डर ही नहीं, एक गंभीर प्रकार की बीमारी है, जिसे बोलचाल की भाषा में डरने की बीमारी भी कहा जाता है

इसमें व्यक्ति को विशेष वस्तुओं, परिस्थितियों या क्रियाओं से डर लगने लगता है। यानि उनकी उपस्थिति में घबराहट होती है, ये फोबिया होने के भी कारण हो सकता है

फोबिया के प्रकार (Types Of Phobia) जानकारी के अनुसार फ़ोबिया (Phobia) 5 प्रकार के होते है -

1. चाइल्डहुड फोबिया (Childhood Phobia)
2. एडल्टहुड फोबिया (Adulthood Phobia)
3. एग्रोफोबिया (Agoraphobia)
4. सोशलफोबिया (Socialphobia)
5. मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया (Monozygotic Twins Phobia)
6. फोबिया के प्रकार (Types Of Phobia)

इन जानकारियों को भी पढ़े -


चाइल्डहुड फोबिया (Childhood Phobia)

चाइल्डहुड फोबिया किसी वस्तु या स्थिति का अत्यधिक भय है। यह एक डर है जो कम से कम 6 महीने तक रहता है। यह एक प्रकार का एंग्जायटी डिसऑर्डर है।
कई बच्चे (और वयस्क भी) उन्हीं चीजों से डरते हैं जिनसे फोबिया वाले बच्चे डरते हैं। लेकिन एक "सामान्य" भय और एक भय के बीच का अंतर चिंता की डिग्री है, और उच्च स्तर की चिंता बनी रहती है।

जब बच्चे लगभग 8-9 महीने के होते हैं, तो वे उन लोगों के चेहरों को पहचान सकते हैं जिन्हें वे जानते हैं। इसलिए नए चेहरे उन्हें डरावने लग सकते हैं - यहां तक कि एक नई दाई या रिश्तेदार भी। इस तरह की डर को चाइल्डहुड फोबिया कहा जाता है.

एडल्टहुड फोबिया (Adulthood Phobia)

कुछ डर वयस्क होने के बाद पैदा होते हैं। इनका प्रभाव सबसे ज्यादा यंग जनरेशन पर पड़ता है। करीब 12 साल से 30 साल के व्यक्ति को इस बीमार का असर हो सकता है जिसे हम एडल्टहुड फोबिया कहते है  एडल्टहुड फोबिया का मरीज अकेलेपन से डरता है। वह भीड़ में खड़ा होकर भी खुद को अकेला ही महसूस करता है। वह कहीं अकेले जा नहीं सकता, अकेले रह नहीं सकता। उसे लगता है कि वह किसी भी परिस्थिति का सामना नहीं कर सकता। ऐसे लोगों का आत्मविश्वास न के बराबर होता है।

एग्रोफोबिया (Agoraphobia)

एगोराफोबिया जिसे हिंदी में जनातंक कहते हैं ये असल में भीड़ का डर है, एगोराफोबिया से पीड़ित व्यक्ति, सार्वजनिक और या अपरिचित स्थानों से बचते हैं, चिंता इस डर के कारण होती है कि चिंता तेज होने पर बचने या मदद पाने का कोई आसान तरीका नहीं है।
ऐसे लोगों को आमतौर पर भीड भरे सार्वजनिक स्थलों, जैसे शॉपिंग मॉल, पार्टी, सिनेमा हॉल या रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर जाते हुए घबराहट होती है। ऐसे लोगों को छोटी दूरी की यात्रा करने में भी बहुत डर लगता है.

सोशलफोबिया (Socialphobia)

विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों तथा लोगों के आसपास होने से स्थाई रूप से पैदा होने वाले डर या चिंता को ही सामाजिक चिंता विकार या सोशलफोबिया (Socialphobia) कहा जाता है। सोशल फोबिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते हैं। सोशल फोबिया के शिकार लोग समाज में लोगों से कम ही घुलते-मिलते हैं और अकेला रहना पसंद करते हैं।

अकेले रहना बुरा नही है पर यदि आप लोगों से दूर भागने लगे हैं और घुटन में जी रहे हैं तो सावधान हो जाइये, आप सोशल फोबिया के शिकार हो सकते है

मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया (Monozygotic Twins Phobia)

यह एक तरह का जेनेटिक फोबिया होता है, जो जुड़वा बच्चों को ही होता है। इसमें अगर एक बच्चा किसी फोबिया का शिकार है तो दूसरा बच्चा भी उसी फोबिया से ग्रस्त हो सकता है, इस तरह से लछन वाले फोबिया को मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया कहा जाता है.

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सुचना - दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको बस फ़ोबिया (Phobia) क्या हैं और फ़ोबिया के कितने प्रकार होते है, इसकी कुछ सामान्य जानकारी दी है. ? दूसरी आर्टिक में हम आपको फोबिया से जुडी सारी जानकारी या साझा करने का पूरा प्रयास करेंगे.

यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. आप ये जानकारी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरुर करें -

माइग्रेन क्या है ? Migraine in Hindi - इसके लक्षण, कारण और उपचार

अगर आप  माइग्रेन क्या है (Migraine in Hindi) या फिर Migraine Ka llaj Kya Hai इसकी जानकारी पाना चाहते हैं, तो आप बिलकुल सही जगह पे आये है हमारी यह पोस्ट Migraine Matlab Kya Hota Hai को शुरू से अंत तक पढना होगा, तभी आप Migraine के बारे में जान पाएंगे। माइग्रेन क्या है? माइग्रेन कितने प्रकार के होते हैं? (What are the types of Migraines in Hindi) माइग्रेन के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Migraine in Hindi).

Migraine (माइग्रेन) in Hindi, माइग्रेन के लक्षण, कारण, इलाज,  माइग्रेन के प्रकार

Table Of Content –

–  माइग्रेन क्या है Migraine in Hindi
– माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?
– माइग्रेन के कारण क्या हैं?
–  माइग्रेन कितने प्रकार के होते हैं?
– माइग्रेन से बचने के उपाय?

What Is Migraine In Hindi – माइग्रेन क्या होता है ?

माइग्रेन क्या है (Migraine in Hindi), माइग्रेन एक विशेष तरह का सिरदर्द है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल (मस्तिष्क से संबंधित) विकार है जो आमतौर पर सिर के एक तरफ पल्सिंग, थ्रोबिंग सिरदर्द जैसे कई लक्षणों का कारण बनता है। आम भाषा मे समझें, तो जब दिमाग मे रक्त का संचार बढ़ जाता है, तो तेज सिर दर्द होने लगता है, इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक, जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

माइग्रेन कोई मामूली सिरदर्द नही होता है इसमें व्यक्ति की हालत ऐसी हो जाती है की उसमें किसी भी काम को करने की शक्ति नही रहती है, (Migraine Kya Hai). माइग्रेन कोई मामूली सिरदर्द नही होता है इसमें व्यक्ति की हालत ऐसी हो जाती है की उसमें किसी भी काम को करने की शक्ति नही रहती है। (Migraine Kya Hai).

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Symptoms of Migraine – माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?

किसी भी अन्य समस्या की तरह माइग्रेन के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो इसकी शुरूआत का संकेत देते हैं। आईये अब जानते हैं माइग्रेन के लक्षण क्या-क्या हैं अथवा Migraine Mein Kya Kya Hota Hai… सिर दर्द होना माइग्रेन का एक सबसे सामान्य लक्षण है, माइग्रेन के लक्षण निम्न प्रकार है जैसे :-

– कब्ज का होना।
– मूड स्विंग का होना।
– भूख लगना।
– गर्दन में अकड़न का होना।
– प्यास लगना।
– बार-बार पेशाब का आना।
– बार-बार जम्हाई का आना।
– शारीरिक श्रम करने से दर्द बढ जाना।
– कुछ लोगों में माइग्रेन के दौरान ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।
– इसका दर्द 4 से 72 घंटों तक रह सकता है।
– आँखों के आगे धुँधलापन आ जाता है।
– कान में सेंसिटिविटी बढ़ जाति है।

माइग्रेन सिर दर्द से जुड़ी बीमारी है इसका असर खास कर के दिमाग पर पड़ता है अगर आपको भी येसा कुछ महसूस होता है तो आपको किसी डॉक्टर से तुरंत अपना ईलाज करवाना चाहिए।

Migraine Causes in Hindi - माइग्रेन के कारण क्या हैं?

माइग्रेन का सही कारण पूरी तरह से समझा नहीं गया है लेकिन मस्तिष्क में असामान्य रूप से तंत्रिका संकेतों, रसायनों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली असामान्य गतिविधि का परिणाम माना जाता है।

माइग्रेन की समस्या (Migraine Causes in Hindi) मुख्य रूप से कुछ कारणों से हो सकती है, जो इस प्रकार हैं-

– शराब का अत्यधिक सेवन।
– कैफीन का अत्यधिक सेवन।
– हॉर्मोन परिवर्तन का होना
– शारीरिक थकावट।
– मौसम का परिवर्तन।
– असंतुलित खाद्य पदार्थ का सेवन।
– बहुत ज्यादा सोने के कारण।
– जरूरत से कम सोने के कारण।
– अधिक दवाइयों का सेवन करना।
– यौनिक गतिविधियों को करना।
– सिरदर्द की दवाएं बिना चिकित्सक की सलाह के लेने से।
– एल्कोहल, तंबाकू, धूम्रपान आदि का ज्यादा सेवन करने से।

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Types of Migraine in Hindi - माइग्रेन कितने प्रकार के होते हैं?

माइग्रेन के प्रकार: जानकारी के अनुसार माइग्रेन के बहुत प्रकार हो सकते है, जिनसे से कुछ हमने आपको निचे बताया है माइग्रेन के निम्न प्रकार जैसे :-

– जटिल माइग्रेन
– सामान्य माइग्रेन
– हेमिप्लेजिक माइग्रेन
– रेटिनल माइग्रेन या ओकुलर माइग्रेन
– क्रोनिक माइग्रेन
– ब्रेनस्टेम ऑरा के साथ माइग्रेन
– स्थिति माइग्रेनोसस

माइग्रेन से बचाव | माइग्रेन से बचने के उपाय - Prevention of Migraine in Hindi

डॉक्टर कहते हैं कि वैसे तो माइग्रेन की समस्या को ठीक करने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन माइग्रेन को रोका जा सकता है। माइग्रेन को रोकने में निम्नलिखित प्रयास मदद कर सकते हैं :-
– हर रात लगभग सात से नौ घंटे सोने की कोशिश करें। 
– गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक ट्रेवल करने से बचे।
– संतुलित दिनचर्या का पालन करना।
– रोजाना 8 से 10 ग्लास पानी जरूर पिये।
– नियमित रूप से व्यायाम करना।
– ध्रूमपान न करना, ध्रूमपान से दूर ही रहना चाहिए।
– माइग्रेन में सिर, कन्धे व गर्दन की मालिस की जाए तो आराम मिलता है।
– डॉक्टर द्वारा बताई गई निवारक दवाएं लें।
– तनाव को प्रबंधित करने में मदद के लिए किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद लें।
– तरल पदार्थ का खूब सेवन करें।

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Alzheimer: अल्जाइमर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

अल्जाइमर रोग (Alzheimer) डिमेंशिया का एक प्रगतिशील यानी तेजी से बढ़ने वाला रोग है। मस्तिष्क की चोटों या बीमारियों से होने वाली स्थितियों के लिए डिमेंशिया एक व्यापक शब्द है। अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो मेमोरी को नष्ट कर देती है। व्यक्ति को बातें याद रखने में कठिनाई हो सकती है और फिर धीरे-धीरे व्यक्ति अपने जीवन में महत्वपूर्ण लोगों को भी भूल जाता है।

Alzheimer: अल्जाइमर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

Table Of Content -

1. अल्जाइमर क्या है (What Is Alzheimer's)
2. अल्जाइमर रोग किसकी कमी से होता है  (What causes Alzheimer's)
3. अल्जाइमर रोग के लक्षण (Symptoms Of Alzheimer's Disease)
4. अल्जाइमर रोग के क्या कारण है ? (What are The Causes of Alzheimer’s)
5. वर्ल्‍ड अल्‍जाइमर डे कब मनाया जाता है ? (World Alzheimer's Day)
6. अल्‍जाइमर के शुरुआती लक्षण ?  (Early Symptoms Of Alzheimer's)
7. अल्‍जाइमर रोग से बचाव ? (Preventing Alzheimer's disease)

Alzheimer: अल्जाइमर क्या है?

अल्जाइमर रोग (Alzheimer's) के कारण आपके चलने का तरीका, आपके बात करने का तरीका और शरीर के काम करने का तरीका बदल सकता है। अल्जाइमर रोग बेहद आम है। इसके कारणों को नियंत्रित करके इस समस्या से निपटा जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

अल्जाइमर को एक प्रकार का डिमेंशिया भी कहते है। अल्जामइर को पूर्ण रूप से ठीक नहीं कर सकते है। लेकिन इनके लक्षणो पर नियंत्रण रख सकते है।

अल्जाइमर रोग के लक्षण: Symptoms of Alzheimer's Disease in Hindi

अल्जाइमर रोग वाले लोगों के व्‍यवहार और लक्षण समय के साथ बदलते हैं। ऐसे में भूलने की बीमारी से घर में कोई भी जूझ रहा हो, तो सतर्क होना जरूरी है। भूलने की बीमारी या हल्के भ्रम का होना अल्जाइमर (Alzheimer) रोग का लक्षण हो सकता है  कुछ प्रमुख लक्षण निम्‍नलिखित हैं।

- समय का ध्यान नहीं होना।
- खराब अनुमान के कारण गलत फैसला लेना।
- केंद्रित करने और सोचने में कठिनाई होती है।
- संख्याओं को पहचानने में कठिनाई।
- चलते समय पैरों का कांपना या लड़खड़ाना 
- वजन कम होना।
- दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाली स्‍मृति में कमी 
- दोस्तों, परिवार और समाज से दूरी 

अल्जाइमर रोग तब होता है जब मस्तिष्क कोशिकाएं मरने लगती हैं। मस्तिष्क का आकार काफी हद तक घटता है। मस्तिष्क के ऊतकों में बहुत कम कनेक्शन और तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं। 

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अल्जाइमर के क्या कारण क्या है ? (What are The Causes of Alzheimer’s in Hindi)

विशेषज्ञों ने अल्जाइमर रोग का एक कारण निर्धारित नहीं किया है, लेकिन शोध से पता चलता है कि मस्तिष्क में कुछ परिवर्तन होने से ही अल्जाइमर रोग होता है । इसके कुछ संभावित कारण ये हो सकते हैं।

- 65 आयु से अधिक होने वाले लोगो में अल्जाइमर का खतरा अधिक रहता है।
- नींद में अनिंद्रा जैसी बीमारी होने के कारण की शिकायत हो सकती है।
- दिमाग में ताउ प्रोटीन और बीटा-एमीलॉइड अमीनो एसिड का जमा होना ।
- सही से खानपान का ध्यान नहीं रखना ।
- रात में ज्यादा देर तक जागना ये भी इसके कारण हो सकता है ।
- पहले कभी सिर में चोट लगता है तो इसके कारण भी हो सकता है ।

वर्ल्‍ड अल्‍जाइमर डे कब मनाया जाता है ? - When is World Alzheimer's Day celebrated?

21 सितंबर को वर्ल्‍ड अल्‍जाइमर डे मनाया जाता है, 'विश्व अल्जाइमर दिवस' पूरे विश्व में मनाया जाने वाला दिवस है। जिससे इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक कराया जा सके। यह बीमारी एक उम्र के बाद लोगों में होने लगती है, जिसमें लोग चीजों को याद नहीं रख पाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ ही बीमारीयां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं.

अल्जाइमर नर्वस सिस्टम से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो यादाश्त पर बुरा असर डालती है. बोलचाल भाषा में इस बीमारी को भूलने की बीमारी भी कहा जाता  है. 

अल्‍जाइमर के शुरुआती लक्षण ? - Early Symptoms Of Alzheimer's Disease

अल्जाइमर (Alzheimer's) दिमाग की याददाश्त से जुड़ी एक बीमारी है इसलिए यह बीमारी से व्यक्ति की याददाश्त असर पड़ता है जिससे व्यक्ति की याददास्त धीरे-धीरे कम होने लगती है। शुरुआती अल्जाइमर के लक्षणों में मामूली स्मृति हानि और रोजमर्रा के कार्यों को ध्यान में रखते हुए परेशानी शामिल हो सकती है।

सुरुआती समय में किसी तरह की समस्या नहीं होती। डॉक्टर भी शुरु शुरू इस बीमारी का पता नहीं लगा पाते, क्योंकि सुरुआती चरण के दौरान प्रभावित व्यक्ति में आमतौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते।

अल्‍जाइमर रोग से बचाव ? Preventing Alzheimer's disease?

अल्‍जाइमर रोग से बचाव इसकी जानकारी हम आपको अगले आर्तिक्ले में बताएँगे इसलिए समय समय पे आप हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहे 

सुचना - दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको बस अल्‍जाइमर रोग क्या है और इसके कारण, लक्षण और उपाय इसकी पूरी जानकारी बताया है ? साथ ही बेवर्ल्‍ड अल्‍जाइमर डे कब मनाया जाता है, इसकी कुछ सामान्य जानकारी दी है.

यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. आप ये जानकारी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरुर करें -

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लीवर ट्रांसप्लांट कैसे होता है | Liver Transplant In Hindi लिवर डोनर लिस्ट | लीवर ट्रांसप्लांट का खर्च

लीवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) क्या है, लीवर का प्रत्यारोपण क्या है एवं इसकी आवश्यकता कब होती है, लीवर का प्रत्यारोपण क्या है एवं इसकी आवश्यकता कब होती है, लीवर ट्रांसप्लांट में कितना खर्च होता है, लीवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant In Hindi) से जुड़ी ये सभी जानकारिया हम इस पोस्ट में आपको बताने वाले है -

लीवर ट्रांसप्लांट कैसे होता है | Liver Transplant In Hindi | Liver Surgery

Table Of Content –

– लीवर ट्रांसप्लांट क्या है  ?
– लिवर ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है ?
– लिवर ट्रांसप्लांट के प्रकार ?
– लीवर ट्रांसप्लांट में कितना खर्च होता है ?
– लिवर ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल और सावधानियां ?

लीवर ट्रांसप्लांट क्या है - What is Liver Transplant in Hindi

आज के समय में लोग धूम्रपान, शराब, तलीभुनी चीजों, जंक फूड, धूम्रपान, खट्टी चीजों का सेवन अधिक करने लगे हैं जिसके कारण लीवर को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ता है। जिससे लीवर का ख़राब होने का खतरा बना रहता है या लीवर ख़राब हो जाता है।

लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी (Liver Transplant) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें लीवर जो अब ठीक से काम नहीं करता है उसे हटा दिया जाता है और मृत या जीवित दाता से लिए गए स्वस्थ लीवर से बदल दिया जाता है। तो इस प्रक्रिया को लिविंग डोनर प्रत्यारोपण या लीवर ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

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लिवर ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है Liver Transplant Surgery kya hai in hindi


लीवर (Liver) हमारे सरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। अगर लीवर ख़राब हो जाता है तो इन्सान का जीवन जीना बहुत मुस्किन हो जाता है बहुत से व्यक्ति इस कारण मर भी जाते है। इस बीमारी से जुज रहे व्यक्ति को अगर लीवर ट्रांसप्लांट किया जाए तो उस व्यक्ति को जीवन और भी लम्बा हो जाता है।

लिवर ट्रांसप्लांट, जिसे एक हिपेटिक ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है, आपके जीवन को बचाने में मदद करता है जब आपका लिवर काम नहीं करता है। हाँ , इसके उपचार में पुरे लिवर को बदला जाता है। इसी कारण लीवर ट्रांसप्लांट कराया जाया है।

लिवर ट्रांसप्लांट के प्रकार - Types of Liver Transplant in Hindi

लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) दो तरह से होता है जो कि डोनर के ऊपर निर्भर करता है -

– लिविंग डोनर ट्रांप्लांट
– डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांट

लिविंग डोनर ट्रांप्लांट - लिविंग-डोनर लिवर ट्रांसप्लांट के दौरान, एक स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का एक हिस्सा (डोनर) हटा दिया जाता है और उनके अस्वस्थ लीवर को बदलने के लिए दूसरे व्यक्ति (प्राप्तकर्ता) में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रकिर्या को डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांट - इसमें आपके लिवर को ऐसे व्यक्ति के लिवर से बदला जाएगा जिसकी हाल ही में मृत्यु हुई है। वयस्कों में पूरे लिवर को बदला जाता है बल्कि बच्चों में स्वस्थ लिवर के कुछ ऊतक ट्रांसप्लांट किए जाते हैं बाकी लिवर उनके शरीर में स्वयं बढ़ जाता है। इस प्रकार की ट्रांसप्लांट को डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

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लीवर ट्रांसप्लांट में कितना खर्च होता है - 

भारत में लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कराने का कुल खर्च लगभग  1900000 से 2500000 तक लग सकता है। हालांकि भारत में बहुत से बड़े अस्पताल के डॉक्टर है जो लिवर ट्रांसप्लांट का इलाज करते है। लेकिन सभी अस्पतालों में लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च अलग-अलग है।

लीवर ट्रांसप्लांट से पहले बहुत सी आवश्यक जांच किया जाया है जिससे और भी बहुत ज्यादा खर्चा हो सकता है अगर गरीब लोगों का लिवर खराब हो जाए तो ट्रांसप्लांट करवाना उनके बस की बात नहीं, इसका खर्च अमीर लोग ही उठा सकते हैं।

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल और सावधानियां ? 

तकनीकी रूप से ट्रांसप्लांट तभी सफल माना जाता है जब शरीर नए अंग और उसकी कार्यशैली स्वीकार कर ले। लीवर ट्रांसप्लांट का मामला भी ऐसा ही है। 

तकनीकी रूप से ट्रांसप्लांट तभी सफल माना जाता है जब शरीर नए अंग और उसकी कार्यशैली स्वीकार कर ले। लीवर ट्रांसप्लांट का मामला भी ऐसा ही है।

– साफ-सफाई रखना
– स्वस्थ आहार खाएं
– नियमित रूप से व्यायाम
– शराब या धुम्रपान न करें

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Important Information About Omicron / ओमिक्रॉन के लक्षण (Symptoms Of Omicron) महत्वपूर्ण जानकारियाँ

कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) देश के कई राज्यों में फैल चुका है. कोरोना वायरस के इस नए वैरिएंट B.1.1.529 को ओमिक्रॉन (Omicron) नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा दिया गया है और इसे ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ घोषित किया गया है.

ओमिक्रॉन (Omicron) से जुड़े कई सवाल सामने आये हैं,  वैज्ञानिक शोध में भी इसे खतरा बताया जा रहा हैं. आज के इस लेख में हम उन्ही कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाबो को जानेंगे –

ओमिक्रॉन (Omicron) क्या है ? ओमिक्रॉन के लक्षण (Symptoms Of Omicron)  महत्वपूर्ण जानकारियाँ

Table Of Content –

– ओमिक्रॉन (Omicron) क्या है?
– ओमिक्रॉन (Omicron) कैसे उभरा?
– ओमिक्रॉन (Omicron) का उच्‍चारण क्‍या है?
– ओमिक्रॉन के लक्षण (Symptoms Of Omicron)
– ओमिक्रॉन वेरिएंट पर टीकाकरण कितना प्रभावी है ?

What is Omicron - ओमिक्रॉन क्या है?

ओमिक्रॉन कोरोना वायरस का एक नया रूप है, जिसे सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका देश में खोजा गया है। कोरोना वायरस का नया वेरिएंट Omicron आधी से ज्‍यादा दुनिया को चपेट में ले चुका है। हमारे देश भारत में भी रोजाना ओमिक्रोन के हजारो मरीज सामने आ रहे है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा B.1.1.529 के रूप में इसे ओमिक्रॉन नाम दिया गया है।

How did Omicron emerge - ओमिक्रॉन कैसे उभरा ?

यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि यह संस्करण कैसे उभरा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सार्स-कोव-2 की वंशावली के नये वायरस B.1.1.1.529, जिसके बारे में माना जाता है कि यह दक्षिणी अफ्रीका में उभरा है, को ओमिक्रॉन (Omicron) के नाम के साथ पूरी दुनिया में फैलता चला जा रहा है ।

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What is the pronunciation of Omicron - ओमिक्रॉन का उच्‍चारण क्‍या है? ओमिक्रॉन का मतलब

गूगल (Google) का अपना सिस्‍टम इसे भारतीय अंग्रेजी में 'ओमाइक्रॉन' बताता है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी यही उच्‍चारण करते हैं। ब्रिटिश इंग्लिश में इसे 'ओमिक्रॉन' कहते हैं जबकि अमेरिकन इंग्लिश के हिसाब से 'आमिक्रॉन' है । न्‍यू ऑक्‍सफर्ड डिक्‍शनरी के अनुसार, इसका उच्‍चारण 'ओमाइक्रॉन' होना चाहिए। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इस कोरोना वायरस का नए वेरिएंट B.1.1.1.529 के नाम का उच्‍चारण अलग-अलग है।

Symptoms Of Omicron - ओमिक्रॉन के लक्षण

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन एनालिसिस (US Centers for Disease Control and Prevention Analysis) के अनुसार ओमिक्रोन के चार लक्षण ज्यादातर लोगों में देखे जा रहे हैं । साउथ अफ्रीका नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) का कहना है कि अब तक ओमिक्रॉन वेरिएंट के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देखे गए हैं. 

जानकारी के अनुसार जो लोग भी ओमिक्रोन से संकर्मित हुए है उनमे कुछ इस तरह का असर देखने को मिला है जो निम्नलिखित है –

– ऑक्सीजन सैचुरेशन में गिरावट 
– गला खराब होने और सूखी खांसी की शिकायत
– कुछ मरीजों में ही तेज बुखार की समस्या
– स्वाद और गंध चले जाना
– रात में तेज पसीना आना
– मांसपेशियों में दर्द होना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि होंठ या नाखून का रंग बदलना, त्वचा का रंग बदलना या कोई दाग होना भी ओमिक्रॉन नए लक्षण हो सकते हैं.

ओमिक्रॉन वेरिएंट पर टीकाकरण कितना प्रभावी है ?

पहले से संक्रमित व्यक्तियों और पूरी तरह से टीकाकरण वाले व्यक्तियों को भी ओमिक्रॉन से संक्रमण का खतरा है जानकारी के अनुसार यहां तक ​​​​कि एक तीसरा बूस्टर शॉट ओमिक्रॉन संक्रमण के खिलाफ पर्याप्त रूप से रक्षा नहीं कर सकता है, ओमिक्रॉन वेरिएंट पर टीकाकरण कितना प्रभावी है  ये सवाल लगभग सभी लोगो के मन में आ रहा है , अगले आर्टिक में हम आपको पूरी जानकारी बताएँगे की ओमिक्रॉन वेरिएंट पर टीकाकरण कितना असरदार हो सकता है.

जब तक आप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी का ख्याल खुद नही रखेंगे तब तक आप अपने आपको और अपने परिवार वालो को इस वायरस ओमिक्रॉन से सुरक्षित नहीं रख सकते हैं इसलिए  कृपया ओमिक्रॉन से जुडी यह जानकारी को अपने सभी दोस्तों या रिश्तेदारों को भी साझा जरूर करें.

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